Tuesday, 3 May 2022

प्यार का दर्द...

 

दो नयन की शरारत

मंजुरी दो दिल की है

इसे ज्यादा हम क्या कहे?

सपनो के नगर से 

भुल गई, रात गई बात गई,

सपने पल मैं खुशी देते है,

तो पल मैं गम देते है,इसे ज्यादा हम क्या कहै?


वादा दिया बडा लेकिन

जान जान कहकर मुंह मुखरने वाले कि न कोइ 

कमी है आप क्या जाने बेवफाई का दर्द, किसीकी यादों में तडपा हो उसके अलावा कोन जाने ये बेचेन मन की आदत....


ए दिल इसे ज्यादा क्या बताए आशियाना....



शैमी ओझा "लफ्ज़"





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